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Value of Being Loved One Sided/YMPH-Daily-Writing-Challenge

07/01/2026 की प्रतियोगिता का विषय है “एकतरफा प्यार का मूल्य” हमसे जुड़े हुए प्रतिभावान कवियों के कविताओं को पढ़िए । प्रेम, डर, और अंधकार ऐसे कई मायने होंगे जो कवियों के दिल को भावुक रखते है । ऐसी भावुकता का हम आदर करते है और उनकी भावनाओं को निपुण बनाना ही संकल्प है हमारा । हम हर रोज किसी न किसी विषय पर अपने व्हाट्सएप्प ग्रुप में Daily Challenge प्रतियोगिता के माध्यम से लेखकों तथा कवियों को उनकी बातों को कलम तक आने का मौका देते है । और जो सबसे अच्छा लिखते हैं । आप उनकी लेख इस पेज पर पढ़ रहे है

The theme of the competition for 07/01/2026 is “Value of Being Loved One Sided”. Read the poems of the talented poets associated with us. Love, fear, and darkness are the many meanings that keep the hearts of poets emotional. We respect such sentiments and it is our resolve to make their feelings adept. Every day, we give an opportunity to writers and poets to put their thoughts to pen through the Daily Challenge competition in our WhatsApp group on different Topic. And those who write best. You are reading those article on this page.

Value of Being Loved One Sided

Little off from topic
This poetry. ..describe pshycology of women in marriage, as most marriage s eventually become onesided love and care(mostly its women who care)

चाहत

एक वख्त था चाहा था हमने बहार को,
मै चाहती हुं तुम मेरी पतजड को भी अपनाओ।

प्यार जताओ नहीं, करो भी मत
चाहती हुं,
बस थोडा सा मुजे समज जाओ।

मुजे संभालो नहीं, गीर जाउं तो उठाओ भी मत,
मे चाहती हुं, बस तुम खुद संभल जाओ।

जख्म मेरे सहलाओ नहीं, मलम लगाओ भी मत,मै चाहती हुं।
बस मेरी दर्दीली नब्स न दबाओ।

गुस्से को जेलो नही, मेरे आंसुओ को हाथ लगाओ भी मत
मै चाहती हुं
बस मेरे दर्द की बजह न बन जाओ।

मुश्किल मे साथ चलो नहीं, मेरा बोज उठाओ भी मत।

मै चाहती हुं,

बस तुम मेरे मनका बोज न बढाओ।

उडने को पंख दो नहीं, आकाश भी दो मत

चाहती हुं

तुम मेरे पैर की जंजीर मत बन जाओ।

@ डो.चांदनी अग्रावत

कैद रहने दो अपनी चाहत में।
रिहाई की ख्वाहिश नहीं मोहब्बत में।।
सज़ा _ए_रुसवाई भी चाहे दे मुझे,
ता उम्र गुज़ार दूं तेरी ही चाहत में।।
न देखें तू मुझको तो कोई ग़म नहीं,
माना की तेरे दिल में हम नहीं,
होती हर किसी की मोहब्बत मुकम्मल कहां…
मगर तेरे इश्क़ का एहसास होगा कम नहीं।।
कब सोचा कि तेरी पार्वती बनूं,
तू मेरा आराध्य मै मीरा बनूं।
तेरे प्रेम में बन जोगन फिरूँ,
सांस का हर कतरा तेरे नाम करूं।।
तू चाहत है मेरी ज़िद्द तो नहीं,
तू भी चाहे मुझे न ऐसा चाहा कभी।।
__आर्या मिश्रा “गुमनाम”
[ Insta ID_gumn.aam 518]

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