11/01/2026 की प्रतियोगिता का विषय है “आत्मसम्मान” हमसे जुड़े हुए प्रतिभावान कवियों के कविताओं को पढ़िए । प्रेम, डर, और अंधकार ऐसे कई मायने होंगे जो कवियों के दिल को भावुक रखते है । ऐसी भावुकता का हम आदर करते है और उनकी भावनाओं को निपुण बनाना ही संकल्प है हमारा । हम हर रोज किसी न किसी विषय पर अपने व्हाट्सएप्प ग्रुप में Daily Challenge प्रतियोगिता के माध्यम से लेखकों तथा कवियों को उनकी बातों को कलम तक आने का मौका देते है । और जो सबसे अच्छा लिखते हैं । आप उनकी लेख इस पेज पर पढ़ रहे है
The theme of the competition for 11/01/2026 is “Self Respect”. Read the poems of the talented poets associated with us. Love, fear, and darkness are the many meanings that keep the hearts of poets emotional. We respect such sentiments and it is our resolve to make their feelings adept. Every day, we give an opportunity to writers and poets to put their thoughts to pen through the Daily Challenge competition in our WhatsApp group on different Topic. And those who write best. You are reading those article on this page.
Self Respect/आत्मसम्मान
जैसे छुअन मात्र से, फूल सिसक उठते हैं,
अनचाहे हाथों से, मेरे जज़्बात भी टूटते हैं।
बुरा लगता है जब कोई, रूह को झकझोर दे,
मेरे वजूद को अपनी मुट्ठी में, बेदर्दी से मरोड़ दे।
जब मुझे निचोड़ा जाता है, मैं आँसू बनकर बहती हूँ,
जैसे फूल रोता है, मैं भी वैसे ही दुख सहती हूँ।
पंखुड़ी-पंखुड़ी होकर, बिखर जाते हैं मेरे सपने,
जिन्हें अपनी पलकों पर, सजाया था मैंने अपने।
हर पंखुड़ी की अपनी महक, अपनी ही पहचान है,
मेरा हर बिखरा हिस्सा, मेरे वजूद का ही प्रमाण है।
जब हर फूल का रंग अलग, और उसकी गंध जुदा है,
तो फिर मेरी तुलना किसी और से, क्यों यहाँ बेवजह है?
उसका सपना, उसका रस्ता, उसकी अपनी कहानी है,
मेरी पहचान भी तो, मेरी अपनी ही ज़ुबानी है।
क्यों माँगूँ अनुमति मैं, अपनी ही धूप पाने को?
क्यों गिरवी रखूँ रूह, महज़ रिश्ता निभाने को?
फिर क्यों त्यागूँ मैं स्वयं को, किसी और के साँचे में?
क्यों सिमटूँ मैं हर बार, समाज के बनाए खाँचे में?
मेरी खुशबू, मेरा रंग, मेरी अपनी एक विरासत है,
अपनी इबारत खुद लिखना, क्या मेरी बगावत है?
मैं नहीं बँधूँगी अब, किसी और की चाहत के अनुसार,
अपनी महक मैं खुद बिखेरूँगी, हवाओं के इस पार।
हां मैं स्त्री हूँ, पर अब चुप्पी स्वीकार नहीं,
मेरा अस्तित्व मेरा है, ये किसी का उधार नहीं।
अपनी खुशबू, अपनी पहचान, मैं गगन तक ले जाऊँगी,
जो मेरी अपनी इबारत है, उसे मैं खुद ही लिख पाऊँगी।
जैसे कोई खुशबू किसी की, जागीर नहीं होती,
वैसे ही मेरे पंखों की, कोई ज़ंजीर रोक नहीं सकती ।
मेरी कोमलता को कमज़ोरी, समझने की भूल न करना,
मैं वो स्त्री हूँ जो जानती है,खुद की इबारत लिखना ।
अगर मैं बिखर भी गई, तो ये मेरा अंत नहीं होगा,
हर बिखरी पंखुड़ी से, एक नया वसंत पैदा होगा।
मैं कोई सजावटी वस्तु नहीं, जो गुलदान में सजाई जाए,
या कोई कटी हुई डाली, जो अपनी मर्ज़ी से झुकाई जाए।
अस्तित्व मेरा है, तो फैसला भी बस मेरा होगा,
चाहे कितना भी रहा हो बचपन अंधेरे में , पर अब नया सवेरा होगा।
मैं बंधूँगी नहीं, मैं बहूँगी—एक आज़ाद धारा की तरह,
मैं चमकूँगी अंधेरों में, एक अटल सितारे की तरह।
मैं वो ’savii ’ हु जो किसी की इजाजत के मोहताज नहीं ,
अब मैं खुद अपनी मंजिल चुनूँगी, ये दुनिया मेरा समाज नहीं।
मैं गूँज हूँ उस चेतना की, जो सोई थी सदियों से,
मेरा व्यक्तित्व अब किसी बनावटी सांचे का मोहताज नहीं।
मिटा दी वो लकीरें, जो मुझे रोकने को खींची थीं,
जला दी वो बेड़ियाँ, जिनसे मेरी रूह सींची थी।
अब मैं वो सैलाब हूँ, जो अपना रास्ता खुद बनाएगी,
उसी माटी से खिलूँगी मैं, जिसे तुमने अपने अहंकार से सींची थी।
हाँ, मैं ‘Savii’ हूँ—अदम्य, अक्षुण्ण और अपराजित,
मेरी आत्मा है मुक्त, और मेरा संकल्प है पूर्णतः परिभाषित।
संध्या गुप्ता
Self-respect is supreme in any relationship.
Self-respect means a lot to me.
Self Respect can’t be compromised for any sake.
When you don’t respect yourself, no one is going to give you respect.
Self-respect is not a thing that can be purchased from a shop, you have to gain it by your self-confidence.
Self-respect is not an item to be sold at any shop.
Self-respect is not just a word for me, but an emotion, a feeling for me.
Without it life is vain.
But, when it comes to your parents you need to sacrifice your self-respect.
If you get disrespected, it feels like you are pushing to death. You must take a stand for yourself.
Self-respect is a good gift for you, now it’s your duty to protect your self-respect.
Self-respect should always be like a date tree, high like the sky.
Don’t compromise it at all, because you need to value yourself.
As you respect others, you need to respect yourself too.
Anushka Pandey
