Calm river flowing through lush greenery in Roussent, perfect for nature lovers.

Long Distance/YMPH-Daily-Writing-Challenge

30/05/2026 की प्रतियोगिता का विषय है “Long Distance” हमसे जुड़े हुए प्रतिभावान कवियों के कविताओं को पढ़िए । प्रेम, डर, और अंधकार ऐसे कई मायने होंगे जो कवियों के दिल को भावुक रखते है । ऐसी भावुकता का हम आदर करते है और उनकी भावनाओं को निपुण बनाना ही संकल्प है हमारा । हम हर रोज किसी न किसी विषय पर अपने व्हाट्सएप्प ग्रुप में Daily Challenge प्रतियोगिता के माध्यम से लेखकों तथा कवियों को उनकी बातों को कलम तक आने का मौका देते है । और जो सबसे अच्छा लिखते हैं । आप उनकी लेख इस पेज पर पढ़ रहे है

The theme of the competition for 30/05/2026 is “Long Distance . Read the poems of the talented poets associated with us. Love, fear, and darkness are the many meanings that keep the hearts of poets emotional. We respect such sentiments and it is our resolve to make their feelings adept. Every day, we give an opportunity to writers and poets to put their thoughts to pen through the Daily Challenge competition in our WhatsApp group on different Topic. And those who write best. You are reading those article on this page.

Long Distance

कुछ लफ्जों में खूबी भी, दिखती है मजबूरी भी
दूरी ज़्यादा होती है दो हाथों की दूरी भी
* अनुपम

दूरियाँ…जैसे शब्द है पर कविता नहीं,
जैसे गीत है पर सरगम नहीं
कलम पकड़े बैठी अकेली,
कागज में ढूंढू अपनी सहेली,
दूरियाँ…
जैसे स्याही को न मिली शब्दों की टोली।

दूरियाँ…जैसे सरिता है पर सागर नहीं ,
जैसे गति है पर विराम नहीं,
सागर किनारे बैठी अकेली,
रेत में ढूंढू अपनी सहेली,
दूरियाँ…..
जैसे नदी को न मिली सागर की झोली।
-Yashvi Patel

Distance कहाँ long लगती है,
जब दिलों को पास रहने की आदत हो।
तुम्हारा रूठना,
फिर उसी अपनापन से मनाना;
उफफ… कुछ रिश्ते फासलों से नहीं,
धड़कनों से चलते हैं।

हाँ, मैं भी दूर… तुम भी दूर,
पर बस नक्शों और किलोमीटरों में।
वरना हमारी भावनाएँ,
हमारे चिंतन,
और दिल की गलियों में बसे संवाद;
आज भी साथ चलते हैं।

जमाने ने long distance को
बदनाम कर रखा है,
पर सच तो यह है;
जो बदलना चाहें,
वे पास रहकर भी पराये हो जाते हैं;
और जो सच्चे हों,
वे दूर रहकर भी अपना संसार रच लेते हैं।

फिर दुनिया की परवाह कैसी?
जब तुम मेरे शब्दों में हो
और मैं तुम्हारी खामोशियों में।

शायद प्रेम का अर्थ
हर पल साथ होना नहीं,
बल्कि दूरी के पार भी
एक-दूसरे में बसते रहना है।

और जहाँ दो आत्माएँ
एक-दूसरे की दुनिया बन जाएँ;
वहाँ दूरी केवल
रास्तों में रह जाती है,
रिश्तों में नहीं।

@P.Saubhagyalaxmi_Juliet♡

Leave a Comment

Scroll to Top