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Pain/YMPH-Daily-Writing-Challenge

23/10/2023 की प्रतियोगिता का विषय है “Pain”। हमसे जुड़े हुए प्रतिभावान कवियों के कविताओं को पढ़िए । प्रेम, डर, और अंधकार ऐसे कई मायने होंगे जो कवियों के दिल को भावुक रखते है । ऐसी भावुकता का हम आदर करते है और उनकी भावनाओं को निपुण बनाना ही संकल्प है हमारा । हम हर रोज किसी न किसी विषय पर अपने व्हाट्सएप्प ग्रुप में Daily Challenge प्रतियोगिता के माध्यम से लेखकों तथा कवियों को उनकी बातों को कलम तक आने का मौका देते है । और जो सबसे अच्छा लिखते हैं । आप उनकी लेख इस पेज पर पढ़ रहे है

The theme of the competition for 23/10/2023 is Pain“. Read the poems of the talented poets associated with us. Love, fear, and darkness are the many meanings that keep the hearts of poets emotional. We respect such sentiments and it is our resolve to make their feelings adept. Every day, we give an opportunity to writers and poets to put their thoughts to pen through the Daily Challenge competition in our WhatsApp group on different Topic. And those who write best. You are reading those article on this page.

रेत भरी हैं आँखों में आंसू से तुम धो लेना

कोई सुखा पेड़ मिले तो उससे लिपट के रो लेना

कुछ तो प्यास बुझाओ रेत की जनम जनम की प्यासी हैं

साहिल के ढलने से पहले अपने पाव भीगों लेना

मैने दरिया से सीखी हैं पानी में पर्दादारी

उप्पर हँसते रहना गहराई में तुम रो देना

Rimjhim@S@
Insta I’d Angekrimjhim0143

Pain…

Words come from pain,
And pain does come from words,
Pain makes us,
Pain takes us away,
We rest in pain,
Pain takes rest away,
We cry in Pain,
But cry, takes pain away.
We concentrate in pain,
Happiness takes concentration away.
Pain is harmful,
But harm is necessary to understand the importance of harmless.
Harm is necessary to reach the position of being harmless.

Aparna

दर्द- हर दर्द में कोई हमदर्द नहीं होता जिस दर्द में हमदर्द हो वह दर्द, दर्द नहीं होता। जो मुश्किलों से गुजरता है, मुकम्मल दर्द सहता है। कोई आगे ना पीछे उसके, दर्द में अकेले ही रहता है। खुशियां बांटने वाले बहुत मिलते हैं, और दुख में छांटने वाले भी बहुत मिलते हैं। सच्चे दिल से चाहने वाला बेदर्द नहीं होता, दर्द में जो हमदर्द हो तो दर्द दर्द नहीं होता।।

Urvashi Mishra

Pain, the unyielding sculptor of our souls, continues to shape us into more powerful and wise people as we go through the difficult things life throws at us. It’s the crucible where our character is tested, and it reshapes us. Every experience of suffering, like a fine chisel in the hand of a skilled artisan, hones the raw substance of our soul, stripping away the excess to reveal the inner strength and wisdom that lies beneath. In the crucible of suffering, we come out of it like works of art, scarred but full of beauty and insight that only the tireless sculptor of pain will reveal.
– M.Tejaswini
Insta id: CrownedIconQuotes

दर्द क्या होता है अच्छे से महसूस किया है हमने अपनी मुस्कान के पीछे छिपाए रखा दर्द हमने कितना मुश्किल होता है कठिन समय का दर्द महसूस किया है हमने फिर भी हमने दर्द को अपने होंठों से कहा न किसी से जिंदगी मे कई दर्द सहन किए फिर भी किसी से कहा न हमने दर्द पर विजय पा ली है और एक मजबूती मिल गई है ऐशा महसूस होता है हमें

Preetirana1630 instagram id

मुक्तक

घुटती है जिंदगी,
मै किससे कहूँ |
बिन अपनो के,
मैं जिन्दा कैसे रहूँ |

माँ बाप की छाया छूटी,
छूट गया साजन का प्यार |
सपने सारे टूट गये,
ऐसा मिला घर द्वार |

जिनपर खुद को त्याग दिया,
बोलते हैं अभिशाप |
जीवन मेरा बन गया है,
मेरे लिए अब श्राप |

पीर न समझे कोई मेरी,
दर्द अकेले सहती हूँ |
बंद हो तन्हा कमरे में,
बस रोती ही रहती हूँ |

ईश्वर को याद कर,
अब ये प्रार्थना करती हूँ |
वेदना न सहे कोई नारी,
बस फरियाद करती हूँ |
कंचन मिश्रा
शाहजहाँपुर ( उ. प्र.)

मेरे दर्द की गहराई का अंदाज़ा तुम नहीं लगा सकते..
हम तुझसे मिलने वाले इस दर्द को भी तरसे हैं!

Dr. Vandana Tiwari
IG- dr.tripathi276
Uttar Pradesh

मन की विवशता को प्रकट नही कर सकता हूँ
दर्द की लकीरों के आघात नहीं सह सकता हूँ
रोते हैं आसूं चीख चीख पल पल मेरे
बहते अश्कों की स्याही से मन लिखता हूँ…..

आघातों का दर्द परे है सीमा से
किंचित मन के घाव परे हैं सीमा से
इन घावों के अश्कों से मैं भरता हूँ
बहते अश्कों की स्याही से मन लिखता हूँ…….

उम्मीदों की किरण जले है ज्वाला सी ज्वाला की जलती मशाल है लावा सी
इस लावा को बुझती किरणो से तपता हूँ बहते अश्कों की स्याही से मन लिखता हूँ…….

हृदय भी सर रख रोता लूहूँ के कतरों पर चुभे शूल जैसे फूलों के अधरों पर
फिर भी इस रक्त रंग से मन को धुलता हूँ बहते अश्कों की स्याही से मन लिखता हूँ…….

जद्दोजज्र सी उथल पुथल अन्तर मन में उम्मीदों की किश्ती डूब रही जल में
इस डूबती किश्ती संग लहरों से लड़ता हूँ बहते अश्कों की स्याही से मन लिखता हूँ…….

✍️ मनोज पाल

क्या-क्या मैं लिखूं..और क्या बतलाए फिरता हूं..

न हंसता हूं न रोता हूं, मैं बेबस हो तुझे पुकारा करता हूं ,
क्या बतलाऊं कैसे सबसे अपना हाल छिपाए फिरता हूं !!

मौसम बीते, सदियां बीती, मैं भी “बीत” गया ऐसे ही ,
पर “एक दर्द” रहा इस सीने में, मैं जिसे उठाए फिरता हूं !!

न कह पाऊं, न सह पाऊं, है अजब फेर ये जीवन का ,
मैं पतझड़ का “सावन” बनकर, आंसू बहाए फिरता हूं !!

ये रातें न तो जागी हैं न सोई सी, दिन बेचैनियों से भरा ,
मैं अजब से इस माहोल को ही , शहर बताए फिरता हूं !!

कभी हालातों से, तो कभी जज्बातों से रूठा सा रहता हूं ,
पर तेरी उन प्यारी बातों से मैं खुद को मनाए फिरता हूं !!

सुकून भी है “साथ” होने का, है दर्द भी पास न होने का ,
कोई कहे कि क्या है ये, जिसे मैं “प्रेम” बनाए फिरता हूं !!

कुदरत के हिस्से हम सब, न जानें क्या लिखा लकीरों में ,
तेरे “उस दिन” के एलान को मैं दिल से अपनाए फिरता हूं !!

सुन “मनसी”, बेहिचक, बेसबब, बेहिसाब, बेशुमार….
जानें क्या-क्या मैं “लिखूं”..और क्या “बतलाए” फिरता हूं !!

नमिता गुप्ता “मनसी”
Instagram id,,namita6498