My-Favourite-Movie/YMPH-Daily-Writting-Challenge

08/08/2023 की प्रतियोगिता का विषय है “My Favourite Movie”। हमसे जुड़े हुए प्रतिभावान कवियों के कविताओं को पढ़िए । प्रेम, डर, और अंधकार ऐसे कई मायने होंगे जो कवियों के दिल को भावुक रखते है । ऐसी भावुकता का हम आदर करते है और उनकी भावनाओं को निपुण बनाना ही संकल्प है हमारा । हम हर रोज किसी न किसी विषय पर अपने व्हाट्सएप्प ग्रुप में Daily Challenge प्रतियोगिता के माध्यम से लेखकों तथा कवियों को उनकी बातों को कलम तक आने का मौका देते है । और जो सबसे अच्छा लिखते हैं । आप उनकी लेख इस पेज पर पढ़ रहे है

My Favourite Movie

My favorite movie – “RAB NE BANADI JODI”
A movie which explains the most accepted definition of love i.e Giving love with out any expecting anything in return.
After a series of dramatical events when surrender got married to his instant crush Taani and Hoplessly falling in love for Taani who’s been heartbroken and misses her deceased fiancee he did things beyond any man to make her happy. He made his proxy self Raj and became her dance partner. Through dance they came close , Raj made her laugh, he made her happy. Happy enough to release her from the past and Taani moved on even with out realizing. Contemporary to that they both fell for each other. But Tani realized she can’t do this surrender who held her hand in her tragic turn and she took a step back.
Not long after that when she came to know that Raj is no one but Surrender. And the lyrics came right in the seen was..
“Na kuch puchha , na kuchh manga
Tumne dil se diya jo diya …
Na kuchh bola, na kuchh tola
Muskurake diya jo diya “

Sonali

गुलमोहर!!

So much to learn and appreciate.
After a long time I had watched a movie, with a feeling that it should never end !!!

Below is what I had felt while watching this movie.

जो कभी अपना था ही नहीं उसे बचाता कैसे,

हर इन्सान के ज़िंदगी में न, एक ऐसा पल आता है। जब वो बिल्कुल टूट के बिखड़ जाता है।
क्यों की ज़िंदगी के कुछ ऐसे भी सच होते हैं, जिन्हें हम कभी भी वैसे के वैसे नहीं अपना पाते हैं।

या यूं कहें कि अपना पाने की ताकत भी नहीं होती है, क्यों की कभी कभी पूरी जिंदगी एक झूठ या एक अधूरे से सच पे टिकी होती है।

और जब कभी अचानक से हम इस सच से रूबरू होते हैं तो फिर पूरी जिंदगी अपने आप में एक छलावा लगने लगती है।

लेकिन एक न एक दिन हम सब को इस सच को गले लगाना ही होता है।
मुक्कमल टूट कर , खुद को फिर से मुक्कमल बनाने के लिए।

Suman Kumar

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